गजब! सचिन गुप्ता,कांग्रेस पार्टी के हैं भी और नही भी। इससे भी बड़ी बात-संघर्ष भी देखती है जनता।

संदीप तोमर

रुड़की। कांग्रेस सेवादल के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाने वाले बड़े कारोबारी रामबिहारी गुप्ता के शिक्षित व सहज व्यवहारी सुपुत्र सचिन गुप्ता रुड़की में मेयर का चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं। छवि और शैक्षिक लिहाज से देखे तो वास्तव में राजनीति में आज ऐसे ही लोगों की जरूरत है,किन्तु ऐसे लोगों को एक बात यह भी समझ लेनी चाहिए कि राजनीति अन्य तमाम खूबियों से कहीं अधिक जनसमस्याओं के लिए संघर्ष भी मांगती है। इसके साथ ही जिस दल से आप जुड़े हों,उसके प्रति आपके समर्पण को सिर्फ दल ही नही जनता भी देखती है,तभी ऐसे हालात बन पाते हैं कि दल किसी व्यक्ति के योग्य होने पर भी उसके साथ अन्याय करे तो जनता उसे विजयी बनाकर न्याय करती है।(रुड़की पालिका चैयरमैन या मेयर के पिछले 2003 से अभी तक हुए सभी चुनाव के परिणाम इसके प्रमाण हैं।) खैर कान्वेंट शिक्षित युवा के साथ ही साफ सुथरी छवि के सचिन गुप्ता के बारे में जैसा कि पहले ही बताया कि वह कांग्रेस सेवादल के पुराने और आला नेता रामबिहारी गुप्ता के सुपुत्र हैं। जाहिर है कि ऐसे में चुनाव लड़ने की बाबत उनकी पहली प्राथमिकता कांग्रेस का सिंबल ही होना चाहिए। खुद एक न्यूज पोर्टल को कुछ समय पूर्व दिए साक्षात्कार में सचिन गुप्ता ने इस बात को यह कहते हुए माना कि वह कांग्रेसी विचारधारा वाले परिवार में पले बढ़े हैं। किंतु इसके साथ ही वह यह भी कहते हैं कि पार्टी ने टिकट नही दिया तो भी चुनाव लड़ेंगे। मतलब बिना टिकट वितरण ही वह बागी बनने का ऐलान भी साथ-साथ ही कर दिए रहे हैं। इससे भी एक कदम आगे यह कि इस इंटरव्यू में उन्हें यह भी जानकारी दी जाती है कि पार्टी उन्हें अपने दावेदार के रूप में देख रही है तो इसे वह अपना सौभाग्य बताते हैं,किन्तु टिकट न मिलने पर भी चुनाव लड़ने की बात पर कायम रहते हैं। यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और होना भी चाहिए,किन्तु पार्टी में रहते पार्टी से बगावत की बात तो यही सन्देश देती है कि वह पार्टी में हैं भी और नही भी। जहां तक टिकट की दावेदारी की बात है तो भले कहीं प्रदेश या और ऊपरी स्तर पर उन्होंने दावेदारी पेश कर दी हो तो अलग बात,किन्तु महानगर अध्यक्ष कलीम खान ने फोन पर हुई वार्ता में उनकी दावेदारी की जानकारी होने से इनकार किया। खैर दावेदारी करना या न करना, इतना बड़ा विषय नही। किन्तु अच्छे व्यवहार और शिक्षित होने से अलग जनसमस्याओं के लिए संघर्ष की बात राजनीति में जरूर मायने रखती है। इसमें कोई शक नही कि सचिन गुप्ता प्रतिवर्ष विभिन्न कांवड सेवा शिविरों आदि में तो खूब नजर आते हैं और कई भंडारों आदि में भी उनका बड़ा योगदान रहता है। इसके अलावा शायद समाजसेवा के उन्होंने अन्य भी कई बड़े कार्य हों,जिनकी जानकारी इस लेखक को न हो। किन्तु जब शहर की समस्याओं की बाबत सचिन गुप्ता को कांग्रेसी परिवार से होने के नाते देखते हैं तो ऐसा कहीं नजर नही आता कि उन्होंने अब से पूर्व शहर की समस्याओं को शासन-प्रशासन के स्तर पर निराकरण के लिए उठाया है। पिछले मेयर यशपाल राणा कांग्रेसी होने के साथ ही उनके निकटस्थ भी माने जाते हैं ऐसे में शायद तब निगम के कार्यों को लेकर न बोल पाना,उनकी राजनीतिक विवशता रही हो पर एक जिम्मेदार नागरिक के नाते तो वह समस्याओं को उठा और सुझाव दे ही सकते थे। आज वह चुनाव जीतने के बाद लीक से हटकर काम करने की बात करते हुए जलभराव जैसी बड़ी समस्या के निराकरण की बाबत ठोस उपाय करने की योजना बनाने की बात कर रहे हैं किंतु उनकी पार्टी के न सिर्फ मेयर बल्कि प्रदेश में सरकार रहते भी वह ऐसी कोई योजना सरकार के समक्ष रख सकते थे,जबकि उनके परिवार का राजनीतिक कद कांग्रेस की दृष्टि से कोई छोटा नही बल्कि काफी बड़ा है। इससे अलग सवाल यह भी है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार रहते निगम का बोर्ड भंग होने के बाद से उन्होंने शहर की समस्याओं को कितना उठाया है? खैर शायद सचिन गुप्ता की व्यक्तिगत सोच हो कि वह मेयर बनकर ही जलभराव जैसी विकट समस्या या अन्य समस्याओं का हल कर सकते हैं।(जैसा उन्होंने उक्त न्यूज पोर्टल के इंटरव्यू में कहा है।) ऐसे में यह देखने वाली बात होगी कि जनता उनके कथन पर कितना विश्वास करती है,फिर चुनाव वह चाहे कांग्रेस के टिकट पर लड़ें या बागी होकर।

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