रेलवे पुल के दोनों और पिलरों के निर्माण पर भड़के ग्रामीण-रुकवाया निर्माण कार्य- जमकर की नारेबाजी…..


रिपोर्ट रुड़की हब
रुड़की। लंढौरा में रेलवे पुल की दोनों ओर पिलर निर्माण कार्य को ग्रामीणों ने हंगामा का रुकवा दिया। ग्रामीणों ने रेलवे विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों के अनुसार पुल के दोनों ओर पिलर
निर्माण से बड़े वाहनों की आवजाही प्रभावित होगी और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वहीं उन्होंने रेलवे, लोनिवि और संबधित ठेकेदार पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए।

लंढौरा में रेलवे पुल के समीप एकत्र हुए सैकड़ों ग्रामीणों ने नारेबाजी करते हुए बताया कि लंढौरा से जौरासी जबरदस्तपुर जाने वाला पुल करीब 25 गांवो को कस्बे से जोड़ता है। कहा कि करीब 125 वर्ष पुराना पुल पूरी तरह जर्जर हो चुका है और इसके निर्माण के लिए 2016 में टेंडर भी हो गया था। जिसके अनुसार इसका निर्माण करीब 80 लाख रुपए में होना था लेकिन टेंडर होने के बाद भी निर्माण कार्य शुरू नही हुआ तो इसको लेकर ग्रामीण कोर्ट चले गए। 2018 में कोर्ट ने एक वर्ष में निर्माण के आदेश संबंधित विभाग को दिए। कोर्ट के आदेश के बाद भी इस पुल का निर्माण कार्य शुरू नही किया गया। वहीं अब इस आदेश के चार वर्ष बाद इस पुल को भारी वाहनों के लिए अयोग्य बताते हुए पुल की दोनों ओर 8 फिट ऊंचे लोहे के पिलर लगाकर बैरिकेड लगाए जाने का कार्य रेलवे द्वारा शुरू कर दिया गया।। ग्रामीणों का कहना है कि हजारों लोगों का प्रतिदिन इस पुल से आवागमन है। इसके साथ ही स्कूल बस, गन्ने की ट्रालियां, फायर ब्रिगेड, एंबुलेंस आदि वाहन भी खासी संख्या में आते जाते हैं लेकिन जब पिलर की ऊंचाई 8 फीट होगी तो यह वाहन यहां से नही आ जा पाएंगे और ग्रामीणों को भारी परेशानी झेलनी होगी। ग्रामीणों ने कहा कि पिलर की ऊंचाई कम से कम 16 फीट रखी जानी चाहिए और जल्द से जल्द इस पुल का निर्माण भी होना चाहिए ग्रामीणों ने रेलवे विभाग के खिलाफ नारेबाजी की ग्रामीणों के अनुसार उन्होंने एसडीएम, रेलवे विभाग व लोनिवि के अधिकारियों से भी फोन पर वार्ता की लेकिन किसी की ओर से उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिल पाया है। उन्होंने कहा कि जब तक कोई ठोस जवाब नहीं मिल जाता तब तक वह निर्माण कार्य नहीं होने देंगे।
इस अवसर पर ग्रामीणों में प्रधान इलियास, मुसर्रत,इसम सिंह,गफ्फार,खुर्शीद,इसरत,भूरा,
सावेज,शामीस, जाशीद,जीरा, मोहम्मद अब्दुल सलाम, नौशाद,आलम आदि ग्रामीण मौजूद रहे।

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