पुणे स्टेशन का प्लैटफॉर्म टिकट इतना महंगा हुआ कि लोग बोले- ये तो निजीकरण का ट्रेलर है


पुणे का रेलवे स्टेशन इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है. क्यों? प्लैटफॉर्म टिकट की कीमत को लेकर. अब इसकी कीमत 50 रुपये कर दी गई है. लोगों की नाराजगी इसलिए भी ज्यादा है कि हाल ही में इस स्टेशन को प्राइवेट हाथों में सौंपा गया है. और प्राइवेट कंपनी ने काम संभालते ही ये बड़ा झटका दे दिया है.
आमतौर पर प्लैटफॉर्म टिकट 10 रुपये का होता है. ये दो घंटे के लिए वैलिड होता है. इसका दाम 50 रुपये करने का मामला इसलिए भी गरमा गया क्योंकि इस पर सियासत होने लगी थी. बात इतनी बढ़ी की रेल मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी. रेल मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्विटर पर कहा कि-
पुणे जंक्शन पर प्लैटफॉर्म टिकट का दाम 50 रुपये रखने का उद्देश्य अनावश्यक रूप से स्टेशन पर आने वालों पर रोक लगाना है ताकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सके. रेलवे प्लैटफॉर्म टिकट की दरों को कोरोना महामारी के शुरुआती दिनों से इसी प्रकार नियंत्रित करता आया है.



पुणे की डीआरएम रेणु शर्मा ने भी इस मामले को लेकर कहा कि कोरोना महामारी को देखते हुए भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्लैटफॉर्म टिकट की कीमत बढ़ाई गई है. इसी के मद्देनज़र टिकट बेचने पर भी रोक लगाई गई थी. सिर्फ विशेष मामलों के लिए ही प्लैटफॉर्म टिकट जारी किए जा रहे हैं. यह व्यवस्था स्थायी नहीं है.

कोरोना के चलते लॉकडाउन को देखते हुए रेल मंत्रालय ने जोनल रेलवेज़ को प्लैटफॉर्म टिकट की कीमत बढ़ाने का अधिकार दे दिया था. इसके बाद सेंट्रल रेलवे, वेस्टर्न रेलवे और ईस्टर्न रेलवे अपने कई स्टेशनों पर प्लैटफॉर्म टिकट 50 रुपये का कर चुका है.
मध्य प्रदेश के हबीबगंज के बाद पुणे दूसरा ऐसा रेलवे स्टेशन बना है, जिसे रखरखाव और पुनर्विकास के लिए प्राइवेट कंपनी को दिया गया है. पुणे को तीन साल के लिए भारत विकास ग्रुप (BVG) को दिया गया है. समझौते के तहत प्राइवेट कंपनी रेल टिकटों की बिक्री के लिए जिम्मेदार नहीं होगी. लेकिन प्लैटफॉर्म टिकट एक अपवाद हो सकता है.

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