पुलिस शिकायत प्राधिकरण में आधारहीन पाए गए निरीक्षक साधना त्यागी व दरोगा हरपाल पर लगे आरोप,उल्टा फिरोज खान के वाटर स्पोर्ट्स कोच होने पर सवालिया निशान

रुड़की(संदीप तोमर)। तथाकथित वाटर स्पोर्ट्स कोच फिरोज खान द्वारा लगभग एक वर्ष पूर्व कोतवाली सिविल लाइन रुड़की की तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक साधना त्यागी एवं वरिष्ठ उपनिरीक्षक हरपाल पर लगाये गए उत्पीड़न,फर्जी चालान एवं फर्जी मुकदमें आदि के आरोपों को जिला पुलिस शिकायत प्राधिकरण गढ़वाल मंडल ने सुनवाई के बाद आधारहीन पाया है। उल्टा प्राधिकरण ने फिरोज खान के वाटर स्पोर्ट्स कोच होने को लेकर कई सवाल उठाए हैं।

हाल निवासी सोत मौहल्ला फिरोज खान पुत्र कय्यूम ने गत वर्ष पुलिस शिकायत प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कराते हुए निरीक्षक साधना त्यागी व एसएसआई हरपाल पर उक्त आरोप लगाए थे। इसमें उसके द्वारा स्वयं को वाटर स्पोर्ट्स कोच बताते हुए कहा गया था कि वह रुड़की में पुरानी गंगनहर पर वाटर बोट क्लब चलाता है तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहा है। उसने खुद के बारे में लेबल 2 कोचिंग कोर्स करने का दावा करते हुए आरोप लगाया था कि कथित रूप से एक अन्य वाटर कोच को लाभ पहुंचाने के लिए गत वर्ष 22 जुलाई को उसे कोतवाली लाकर साधना त्यागी एवं हरपाल द्वारा उसका शारीरिक एवं मानसिक रूप से उत्पीड़न किया गया। इसके साथ ही उसका 151 में फर्जी चालान किया गया। यही नही एक फर्जी मुकदमा भी उसके खिलाफ दर्ज किया गया।


इस मामले की पूर्ण सुनवाई के बाद प्राधिकरण के अध्यक्ष न्यायधीश केडी भट्ट व सदस्य एसके शुक्ल ने विगत 21 अगस्त को अपना आदेश/निष्कर्ष सुनाया है। दोनों पक्षों को सुनने व लिखित साक्ष्यों के आधार पर जारी आदेश में प्राधिकरण अध्यक्ष व सचिव ने कहा है कि फिरोज खान ने निरीक्षक साधना त्यागी व उपनिरीक्षक हरपाल पर जो आरोप लगाए हैं वह आधारहीन हैं। शिकायतकर्ता फिरोज द्वारा अपने कथनों की पुष्टि के सम्बंध में कोई दस्तावेज दाखिल नही किये गए। आदेश में कहा गया है कि फिरोज खान के पास वाटर स्पोर्ट्स चलाने का न तो कोई लाइसेंस है और न ही लेबल 2 कोच होने का कोई प्रमाण है। पुलिस द्वारा नियमानुसार शिकायत पर उसके विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई तथा 151 की कार्रवाई की गई। उसके पास वाटर स्पोर्ट्स चलाने का कोई वैध लाइसेंस भी स्वीकृत नही है। ऐसा भी कोई तथ्य नही मिला, जिससे यह जाहिर होता हो कि फिरोज खान से किसी तरह की कोई अवैध मांग की गई। शिकायत को बलहीन मानते हुए प्राधिकरण ने कहा है कि ऐसा लगता है कि पुलिस पर नाजायज दबाव बनाने को शिकायत की गई। प्राधिकरण ने अपने आदेश में शिकायत पर किसी अग्रिम कार्यवाही की आवश्यकता को खारिज कर दिया है।

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